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शिशॠको इस उमà¥à¤° से खिलाना शà¥à¤°à¥‚ करें दलिया, मिलेंगे दोगà¥à¤¨à¥‡ फायदे
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में दलिये को बेहद पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार माना जाता है लेकिन कà¥â€à¤¯à¤¾ आप ये जानती हैं कि शिशॠको दलिया कब या किस उमà¥à¤° से देना शà¥à¤°à¥‚ कर सकते हैं?
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ आहार में दलिये को बहà¥à¤¤ पौषà¥â€à¤Ÿà¤¿à¤• माना जाता है। बचपन से ही हमें अपनी डायट में दलिये को शामिल करना सिखाया जाता है। दलिया बड़ों ही नहीं बलà¥à¤•ि बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ शिशॠके लिठà¤à¥€ बहà¥à¤¤ फायदेमंद होता है।अगर आप à¤à¥€ अपने शिशॠको à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ आहार देना चाहती हैं जो सà¥â€à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥â€à¤Ÿ होने के साथ-साथ पौषà¥â€à¤Ÿà¤¿à¤• à¤à¥€ हो तो आप उसे दलिया खिला सकती हैं। दलिया मीठा और मसालेदार, दोनों तरह से बनाया जा सकता है।
​दलिया कà¥â€à¤¯à¤¾ है
गेहूं का टूटा हà¥à¤† हिसà¥â€à¤¸à¤¾ दलिया होता है। ये जौ, गेहूं या फिर मकà¥â€à¤•े जैसी अलग-अलग अनाजों से बन सकता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के अधिकतर राजà¥â€à¤¯à¥‹à¤‚ में गेहूं से बना दलिया ही खाया जाता है और इसे आप कई तरह से पका सकते हैं।
वयसà¥â€à¤•ों और बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगाढ़ा दलिया जâ€à¤¬à¤•ि शिशॠको पतला दलिया खिलाया जाता है। शिशॠको ठोस आहार देना शà¥à¤°à¥‚ करने पर पतला दलिया बचà¥â€à¤šà¥‡ के लिठनिगलना और पचाना आसान होता है।
​नवजात शिशॠको कब दे सकते हैं दलिया
शिशॠको दलिया खिलाने का पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण यह है कि इससे पेट जलà¥â€à¤¦à¥€ à¤à¤° जाता है। ये पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• होता है और शिशॠको खूब à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ देता है। ये पाचन तंतà¥à¤° को उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ करता है। इसीलिठ7 से 8 महीने का होने पर बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को दलिया खिलाना शà¥à¤°à¥‚ किया जाता है।
हालांकि, शिशॠको दलिया खिलाने की सही उमà¥à¤° 10 से 12 महीने की होती है। इस उमà¥à¤° तक शिशॠठोस आहार को पचाने में सकà¥à¤·à¤® हो जाता है और उसे दलिये के जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ लाठमिल पाते हैं।
​बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को दलिया खिलाने के फायदे
जब à¤à¥€ आप शिशॠको ठोस आहार खिलाना शà¥à¤°à¥‚ करें तो उसे à¤à¤¸à¥€ चीजें खिलाà¤à¤‚ जिनमें कई तरह के पोषक ततà¥â€à¤µ मौजूद हों। दलिये के शिशॠको मिलने वाले सà¥â€à¤µà¤¾à¤¸à¥â€à¤¥à¥â€à¤¯ लाà¤à¥‹à¤‚ के बारे में नीचे बताया गया है।
à¤à¥‚ख बढ़ाता है
दलिया खाने से शिशॠकी à¤à¥‚ख बढ़ती है। सà¥â€à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने के साथ ही आप बचà¥â€à¤šà¥‡ को दलिया खिलाना शà¥à¤°à¥‚ कर सकती हैं।
​पोषक ततà¥â€à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र
इसमें खनिज पदारà¥à¤¥, फासà¥â€à¤«à¥‹à¤°à¤¸, मैगà¥â€à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और आयरन पà¥à¤°à¤šà¥à¤°à¤¤à¤¾ में पाया जाता है। ये सà¤à¥€ पोषक ततà¥â€à¤µ शिशॠके मानसिक और शारीरिक विकास में बहà¥à¤¤ अहम होते हैं।
​पाचन तंतà¥à¤° मजबूत होता है
दलिये को जिस तरीके से बनाया जाता है उससे इसमें कà¥à¤› विशेष यौगिक और ततà¥â€à¤µ रिलीज होते हैं जो कि फाइबर से यà¥à¤•à¥â€à¤¤ होते हैं और इनमें कई तरह के पोषक ततà¥â€à¤µ à¤à¥€ मौजूद होते हैं। ये पाचन तंतà¥à¤° के विकास में मदद करते हैं और मेटाबोलिजà¥â€à¤® में à¤à¥€ सà¥à¤§à¤¾à¤° लाते हैं।
अब तो आप जान गठना कि दलिया वयसà¥â€à¤•ों के लिठही नहीं बलà¥à¤•ि शिशॠके लिठà¤à¥€ बहà¥à¤¤ फायदेमंद आहार है। ठोस आहार लेने वाले बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ के आहार में तो दलिये को जरूर शामिल करना चाहिà¤à¥¤ इससे उसे सà¤à¥€ जरूरी पोषक ततà¥â€à¤µ मिल जाते हैं और शारीरिक à¤à¤µà¤‚ मानसिक विकास में मदद à¤à¥€ मिलती है।
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